Monday, September 1, 2008

ऐसा मंजर जिसकी कल्पना भी नही की थी


जम्मू मे अमरनाथ भूमि का मसला भले ही अब हिन्दुओ के पक्ष मे हो गया हो लेकिन उसके बाद भी वहा के हालात कब तक ठीक होगे ये तो वक्त हे बताएगा। मैं दो महीने पहले अपनी फॅमिली के साथ वहा गया था। जब हम जम्मू पहुचे तो उस ही वक्त अमरनाथ श्राइन बोर्ड का मामला टूल पकड़ना शरू हो गया था। वैसे मैं अपनी फॅमिली के साथ वहा नही जाना चाहता था, इसके लिए मैंने कई प्लानिंग भी की। लेकिन घरवालो के दबाव के चलते मुझे वह जाना पडा हालांकि मैं अपनी शर्त पर गया था की मैं चार दिन में वापस आ जाउगा। लेकिन ऐसा हो नही पाया।
.......... रास्ते मै ऐसे बिगडे हालात
जम्मू से श्रीनगर पहुचने तक तो सब ठीक था। हमने जम्मू से एक कार रेंट पर ले ली थी। आगे के सफर में क्या होने वाला था ये कभी सोचा भी नही था। और न ही इस बात की कभी कल्पना के थी के हमारे साथ भी ऐसा हो सकता है। अगले दिन हम सुबह ३ बजे ही श्रीनगर से गुलमर्ग की और रवाना हो गए। हम यहाँ गुलमर्ग में एन्जॉय कर रहे थे और वहा श्रीनगर में हालत बेहद ख़राब हो रहे थे। ज़मीन के मामले में लोग मारपीट और सडको पर उतर आए थे। गुलमर्ग से हम दोपहर दो बजे ही फ्री हो गए थे। ड्राईवर के पास पहुचे तो पता चला के श्रीनगर में फ़िर टेंशन शुरू हो गया था। उसका कहना था की शाम तक नही जा सकते है इसलिये गुलमर्ग में ही रुकना पड़ेगा। हमारे ड्राईवर का नाम हैप्पी था और जैसा नाम था वो ख़ुद भी वैसा ही था। शाम तक हम गुलमर्ग के पास ही रुके रहे। इस दौरान हैप्पी ने हमारा टाइम वहा के किस्से सुनकर पास किया। वहा पर फसने वाले हम अकेले नही थे करीब पाच हज़ार से ज्यादा टूरिस्ट भी हालत सामान्य होने का इंतजार हमारे जैसे ही कर रहे थे। ख़ैर शाम भी हो गई और सबके साथ हम भी गुलमर्ग से निकल ही रहे थे के तीन किलोमीटर आगे सभी की गाड़ी वहा की लोकल पुलिस ने ये कहकर रोक दी की आगे टेंशन है। दो घंटे सभी को फ़िर वही रुकना पड़ा। पाँच हज़ार से ज्यादा टूरिस्ट वह जमा थे और केवल सात पुलिसवाले। कुछ देर बाद वहा के लोकल लड़को ने नारेबाजी शुरू कर दी। वो सभी हिंदू विरोधी नारे लगा रहे थे। पुलिसवालों को यह लगना शुरू हो गया था की यहाँ पर यदि टूरिस्ट रुके और इनपर किसी तरह का कोई हमला होता है तो जवाबदारी उन पर होगी। लोगो को वहा से हटाने के उन्होंने तीन से ज्यादा नाकाम कोशिश करने के बाद आख़िर उन्होंने सेना को मदद के लिए कॉल किया।
ऐसा जवाब जिसे सुनकर यकीन ही नही हुआ
सेना के किसी ऑफिसर से हो रही बात को मैं भी सुन रहा था। वायरलेस पर जो जवाब वह से आया उसे सुनकर एक पल के लिए मुझे यकीन ही नही हुआ। वहा से ये कहा गया की जब तक उन्हें उपर से आर्डर नही मिलेगे वो कुछ नही कर सकते। मुझे सेना के उस ऑफिसर की बात सुनकर एक बार तो तकिन हे नही हुआ। वो कैसे पाच हज़ार टूरिस्ट को इस कन्डीशन मै छोड़ सकते है।
फ़िर क्या था बातचीत के दस मिनट के बाद ही पुलिस वालो ने टूरिस्ट को वह से आगे जाने को कह दिया । वो ये बात अच्छे से जानते थे की उनके रहते हुए यदि एक भी टूरिस्ट को कुछ भी हुआ तो उनपर ही इसकी जवाबदारी आएगी। अपनी जान बचाने के लिए उन्होने टूरिस्ट की जान खतरे मै डालने मै जरा भी देर नही की।
.... और शुरू हुआ वो डरावना सफर
लगभग ढाई सो गाडियो का काफिला एक साथ वहा से निकला। इतने लोग साथ मै थे इस बात की राहत तो जरूर थी लेकिन आगे क्या होगा इसकी चिंता हर किसी के चेहरे पर भी साफ़ नज़र आ रही थी। अभी हम वह से दो किलोमीटर ही आगे चले थे की अचानक हम से आगे चल रही गाड़ीयो की स्पीड तेज़ होती हुई नज़र आई। हम कुछ समझ पाते इससे पहले वह के लोगो की तरफ़ से टूरिस्ट की कार पर फेके जा रहे पत्थर हमारी कार पर पड़ना भी शुरू हो गए थे। अचानक गाड़ी पर पढ़ने वाली पत्थरों से हम सभी बेहद डर गए थे। हमारे गाड़ी की स्पीड भी अब तेज हो गई थी। इसके साथ ही तेज हो गई थी पत्थरों की बरसात। उस वक्त क्या हो रहा था किसी को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। बस हैप्पी की आवाज आई सब अपने साइड के ग्लास चढ़ाकर सिर नीचे कर लो। अगले कुछ सेंकड में एक पत्थर हैप्पी के सिर पर आकर लगा। उसकी साइड का ग्लास थोड़ा खुला हुआ था जिसकी वजह से पत्थर उसे लगा। हालांकि उसे ज्यादा चोट नहीं लगी पर उस हादसे ने आगे के सफर को लेकर चिंता और ज्यादा बढ़ा दी थी। कुछ ही मिनटों में हमारी गाड़ी वहां से गुजर गई। सभी बेहद डरे हुए थे और सभी बस वहां से किसी तरह गुजर जाना चाहते थे। इसके साथ ही तेज हो गई थी पत्थरों की बरसात। उस वक्त क्या हो रहा था किसी को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। बस हैप्पी की आवाज आई सब अपने साइड के ग्लास चढ़ाकर सिर नीचे कर लो। अगले कुछ सेंकड में एक पत्थर हैप्पी के सिर पर आकर लगा। उसकी साइड का ग्लास थोड़ा खुला हुआ था जिसकी वजह से पत्थर उसे लगा। हालांकि उसे ज्यादा चोट नहीं लगी पर उस हादसे ने आगे के सफर को लेकर चिंता और ज्यादा बढ़ा दी थी। कुछ ही मिनटों में हमारी गाड़ी वहां से गुजर गई। सभी बेहद डरे हुए थे और सभी बस वहां से किसी तरह गुजर जाना चाहते थे। इसके साथ ही तेज हो गई थी पत्थरों की बरसात। उस वक्त क्या हो रहा था किसी को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। बस हैप्पी की आवाज आई सब अपने साइड के ग्लास चढ़ाकर सिर नीचे कर लो। अगले कुछ सेंकड में एक पत्थर हैप्पी के सिर पर आकर लगा। उसकी साइड का ग्लास थोड़ा खुला हुआ था जिसकी वजह से पत्थर उसे लगा। हालांकि उसे ज्यादा चोट नहीं लगी पर उस हादसे ने आगे के सफर को लेकर चिंता और ज्यादा बढ़ा दी थी। कुछ ही मिनटों में हमारी गाड़ी वहां से गुजर गई। सभी बेहद डरे हुए थे और सभी बस वहां से किसी तरह गुजर जाना चाहते थे। इसके साथ ही तेज हो गई थी पत्थरों की बरसात। उस वक्त क्या हो रहा था किसी को कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। बस हैप्पी की आवाज आई सब अपने साइड के ग्लास चढ़ाकर सिर नीचे कर लो। अगले कुछ सेंकड में एक पत्थर हैप्पी के सिर पर आकर लगा। उसकी साइड का ग्लास थोड़ा खुला हुआ था जिसकी वजह से पत्थर उसे लगा। हालांकि उसे ज्यादा चोट नहीं लगी पर उस हादसे ने आगे के सफर को लेकर चिंता और ज्यादा बढ़ा दी थी। कुछ ही मिनटों में हमारी गाड़ी वहां से गुजर गई। सभी बेहद डरे हुए थे और सभी बस वहां से किसी तरह गुजर जाना चाहते थे।
और बिगड़ गई हैप्पी की तबीयत
पत्थर अब रास्ते में पढ़ने वाले हर गांव में पढ़ना शुरू हो गए थे। कार में जिसके पास जो कपड़ा था हैप्पी के कहने पर सभी ने अपना सिर उससे ढ़क लिया था। डर क्या होता है ये मुझे भी उस दिन महसूस हुआ। मैं कभी डरता नहीं हूं लेकिन उस दिन मैं डर रहा था। मुझे खुद से ज्यादा मेरी फैमिली की चिंता हो रही थी। बस मन में एक ही दुआ ऊपर वाले से मांग रहा था कि किसी तरह हम वापस श्रीनगर सेफ पहुंच जाए। लेकिन शायद उस वक्त ऊपर वाला भी हमारी नहीं सुन सकता था। सफर चल ही रहा था कि आगे जाकर गाड़ी फिर रूकी। पता नहीं था कि अब क्या होगा। हैप्पी बाहर निकला और कुछ देर बाद ही उसे उल्टी होने लगी। उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। वो भी ज्यादा बड़ा नहीं था उसकी उम्र महज २४ साल ही थी। गाड़ी वहां क्यों रूकी है किसी को कुछ नहीं पता था। हम सब चुपचाप कार में बैठे हुए बस यहीं प्राथॆना कर रहें थे कि आगे सबकुछ ठीक हो। यहां हैप्पी की तबीयत ठीक नहीं थी लेकिन वो भी जानता था कि जिस हालात में हम वहां फंसे थे यदि उससे जल्दी नहीं निकले तो पता नहीं और क्या हो जाएगा।

1 comment:

-- said...

kya khubsurat tarkie se aap likhate hai aapka to koi jawab hi nahi subhanallaha
aur isi tarah se likhate rahe to sach kahata hu ki kayamat aa jayengi