Thursday, July 16, 2009

मैं पिछले तीन महीनो से एमपी छोड़ चुका हु। ऐसे कई बातें है जो मुझे एमपी की याद आती है लकिन ऐसे भी कई बाते है जो मैं भूलना चाहता हु। समय कभी भी एक जैसा नही रहता है। मेरा समय भी शायद बदलना शुरू हो गया। मैं अप्रैल से २००९ से नवभारत पुणे मैं एडिटोरिअल चीफ के तोरे पर कम कर रहा हूमुझे लगता है की वक्त भले ही बदल गए पर हालत नही बदलते है। यहाँ भी कमोबेश वही हालत है या ये कहे की वहासे भी ख़राब है।

Wednesday, January 28, 2009

कई दिनों के बाद....


आज काफी दिनों बाद या कहें लगभग तीन महीनों बाद मैं कुछ लिख रहा हूं। पिछले कुछ महीनों में काफी कुछ बदल गया है। मैं अब तक दो संस्थान छोड़ चुका हूं। चार सालों तक दैनिक भास्कर में काम किया लेकिन कभी भी वहां उस तरह की सिचुएशन नहीं नहीं आई जिस तरह कि पिछले कुछ महीनों में मैंने फेस की।