मुझे लिखने का शौक कभी भी नहीं था। बचपन से लेकर स्कूल औऱ कॉलेज लाइफ में हमेशा ही मैं लिखने से बेहद बचता रहा। लेकिन कहते है न कि आप जो सोचते है या जिससे बचने की कोशिश करते है वो कही न कही आपके सामने जरूर आता है। इसलिए मैं एक पत्रकार बना। और आज जिस चीज़ से हमेशा बचता था वही चीज़ आज मुझे सबसे ज्यादा सुकून देती है।

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