Sunday, August 24, 2008

अजीब दास्ता नाम इसलिये रखा है....

मैंने अपने इस ब्लॉग का नाम अजीब दास्ता है इसलिये रखा है क्योंकि मुझे लगता है कि ज़िन्दगी कई बार हमारे सामने अजीबदास्ता पेश करती है। मेरा नाम अमित देशमुख है। भोपाल का रहने वाला हू और एक जर्नलिस्ट हू। मैंने बारहवी के बाद से ही सोच कर रखा था कि मुझे एक जर्नलिस्ट बनना है इसलिये आज बतोर जर्नलिस्ट पिछले तीन साल से काम कर रहा हू। और फिलहाल राजस्थान के एक बड़े ग्रुप के अख़बार में रिपोर्टिंग हेड हू। पिछले तीन सालो में जो अनुभव मुझे हुए है उसको देख कर लगता है की ज़िन्दगी का एक बहुत बड़े पड़ाव से गुज़र चुका हू। अब ऐसा लगता है की शायद ही कोई ऐसा अनुभव हो जो मेरे लिए चौकाने वाला हो। आज जिस उम्र का मैं हू उसमे ज़िन्दगी को जितना समझा है हर बार मुझे हर पहलु वो अजीब दास्तां ही पेश करती नज़र आई है। फ़िर बात चाहे दोस्ती की हो या फ़िर घर की या फ़िर बात करू पत्रकारिता में मिलने वाले कुछ लोगो की जिन्होंने इस बात को और ज्यादा पुख्ता ही किया है। हो सकता है ये मेरा पर्सनल एक्स्पीरिएंस हो या महज मेरे विचार लकिन कुछ तो है।

No comments: